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महोदय, विकसित देशों की भाँति विकासशील देशों में फिलहाल यह समस्या नहीं है, लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में, विशेषकर संभ्रांत परिवारों और कामकाजी माता-पिता के बच्चों के बीच मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। वैसे तो बच्चों के मोटे होने के लिए कई परिस्थितियाँ जिम्मेदार होती हैं, जैसे उनके पैतृक गुण, भूख, उसका स्वभाव और दुखी होना। किन्हीं विशेष प्रकरणों में हार्मोन संचय में गड़बड़ी होना मोटापे का कारण बन जाता है। यदि बच्चे के माता-पिता मोटे हैं, तो बच्चे के भी मोटे होने की संभावना बढ़ जाती है।पैतृक कारणों के अलावा, बच्चे का स्वभाव भी उसके मोटापे के लिए जिम्मेदार साबित होता है। जो बच्चे ज्यादा नाखुश रहते हैं, वे प्रत्यक्ष रूप से ज्यादा खाने के आदी हो जाते हैं। ऐसे बच्चों में असमय खाने की आदतें कहीं ज्यादा होती हैं। जब कभी उनका मन नहीं लगता, वे कुछ खा-पीकर अपना मन बहलाने की कोशिश करते हैं, और धीरे-धीरे यह आदत बढ़ती जाती है, जो उनके मोटापे का कारण बन जाती है। इसके अलावा, जो बच्चे खेलकूद में दिलचस्पी नहीं रखते, उनके भी मोटा होने की संभावना होती है। व्यायाम की कमी से शरीर की ऊर्जा चर्बी में परिणत होने लगती है। इन सब परिस्थितियों में मोटापे के आसार बढ़ने लगते हैं।'अधिक भूख लगना और अधिक भोजन खाना' मोटापे का सबसे बड़ा कारण होता है। नवजात शिशु ही क्यों न हो, उसे आवश्यकता से अधिक दूध पिलाना अवांछनीय है। दूध के स्थान पर ठोस आहार देना कहीं अधिक श्रेयस्कर होता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसके खाने-पीने में खासकर इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उसमें चर्बी बढ़ाने का कारण बनने वाले खाद्य पदार्थ, खासकर घी, मक्खन आदि का इस्तेमाल अनुपात से ज्यादा न होने पाए।करीब छह-सात वर्ष से लेकर चौदह-पंद्रह वर्ष तक की उम्र के बच्चों का शारीरिक विकास अत्यधिक तेज हो जाता है। इस उम्र के दौरान विभिन्न शारीरिक एवं हार्मोन परिवर्तनों के कारण बच्चों में मोटापा बढ़ने का खतरा रहता है। मोटापा बच्चों के लिए कई बार अभिशाप बन जाता है। अन्य बच्चे उसे मोटा कहकर चिढ़ाते हैं तथा उसके साथ खेलना पसंद नहीं करते। इस प्रकार, दुखी होने और अकेलेपन के कारण स्वयं को सांत्वना देने के लिए बच्चा सामान्य से क्रमशः मोटा ही होता चला जाता है।इतना ही नहीं, यही मोटापा बच्चे के आलसी होने का मुख्य कारण बनता है। सामान्य जीवन में वह अन्य बच्चों की तुलना में पहले खेलने-कूदने में और फिर कई बार पढ़ने-लिखने में पिछड़ने लगता है। यही नहीं, बचपन का मोटापा युवावस्था और अधिक उम्र होने पर रोगों का कारण बनता है। मोटापा हृदय रोग, कुछ प्रकार के कैंसर और समय से पहले मौत का प्रमुख कारण बन जाता है। अत्यधिक मोटापा शरीर में चर्बी को जन्म देता है, जिसका असर रक्त की धमनियों और शिराओं पर पड़ने लगता है।
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