AGRAWAL STENO
Call us:
+91 8868822355, 9997878593
Please Wait a Moment
Menu
Dashboard
Register Now
demo2 (Hindi)
Font Size
+
-
Reset
Backspace:
0
Timer :
00:00
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसमें ऐसा लगता है कि बड़े मंचों पर शांति की बातें तो की जाती हैं, मगर सुलह की बजाय संघर्ष को ही आखिरी हल मान लिया गया है। हैरानी की बात यह कि युद्ध के परिणाम गंभीरता का पाठ पढ़ाने वाले कुछ ताकतवर देशों के नेताओं को भी अपने प्रभाव से संघर्ष को टालने के रास्ते तलाश करना प्राथमिक नहीं लगता। इसके उलट वे ताकत और जीत के दावों में उलझकर अपने अभियानों में शामिल होना जरूरी समझते हैं। बीते कुछ महीनों से इजरायल और अमेरिका ने ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इससे साफ है कि अगर विवाद के मूल बिंदुओं के केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय मंच की मध्यस्थता से बिना देरी किए संबंधित पक्षों की बात नहीं सुनी गई, तो हालात को संभालना मुश्किल होगा। ऐसी स्थिति के बीच शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर सीधे हमले करके अपनी मंशा जाहिर कर दी। अपने हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को इजरायल और अमेरिका बेशक अपनी कामयाबी मानें, लेकिन इससे अब नया मोड़ ले चुके अस्थिरता का खतरा किस पैमाने पर बढ़ गया है, वह किस दिशा की ओर बढ़ेगा, यह देखने की बात होगी। इसके अलावा, इजरायली हमले में ईरान के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचा और सैकड़ों नागरिक मारे गए। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी और इजरायल के कई ठिकानों पर सामरिक मिसाइल दागीए जिनमें कई जानें गईं। व्यापक क्षति हुई। सवाल तो है कि इस युद्ध का उद्देश्य आखिर क्या है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि मकरान सूर्योदय की निशाना बनाने की जिद में बनी सत्ता में बैठी व्यवस्था को हटाना है। यह समझना मुश्किल है कि अमेरिका एक ओर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए दबाव बना रहा है, तो अब वह अपना उद्देश्य मौजूद ईरान सत्ता को खत्म करना बता रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए ओमान की मध्यस्थता में बातचीत भी चल रही थी। हालांकि इस युद्ध से पहले की कुछ जरूर बढ़त हुई थी, लेकिन उसने यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार रखने की बात दोहराई। अब इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष के बाद यह वार्ता फिलहाल ठंडी हो चुकी है। जिस दौर में विकास के नारे के साथ सभी देश बेहतर भविष्य का सपना गढ़ना चाहते हैं, उसमें संवाद के रास्ते बंद करके युद्ध का रास्ता अख्तियार करने का नतीजा आखिर क्या निकलेगा, रूस.यूक्रेन के बीच जारी युद्ध वैश्विक शांति के लिए पहले ही एक जटिल चुनौती है। हाल ही में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पक्की खुली जंग ने भी एक नया मोर्चा खोल दिया।
Submit
Submit Test !
×
Dow you want to submit your test now ?
Submit