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बढ़ाना आज का समय तेजी से बदलती तकनीकी का है। जीवन के लगभग हर क्षेत्र में अब डिजिटल साधनों का प्रयोग किया जा रहा है। शिक्षा, व्यापार, शासन, बैंकिंग, स्वास्थ्य, संचार और मनोरंजन सभी में तकनीकी का प्रभाव साफ देखा जा सकता है। भारत सरकार द्वारा आरंभ किया गया “डिजिटल इंडिया” अभियान देश को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। डिजिटल व्यवस्था से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, पर इसके साथ कई तरह के जोखिम भी सामने आए हैं। आज हर व्यक्ति मोबाइल फोन और इंटरनेट से जुड़ा है, परंतु हर कोई इसके सुरक्षित उपयोग के नियम नहीं जानता। इसी कारण साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। आए दिन ऐसे समाचार मिलते हैं कि किसी व्यक्ति को फोन कॉल, मैसेज या फर्जी लिंक के माध्यम से धोखा देकर उसके बैंक खाते से धन निकाल लिया गया। कई बार लोग अंजान लिंक पर क्लिक कर अपने पासवर्ड, ओटीपी या बैंक विवरण साझा कर देते हैं, जिससे वे ठगी का शिकार बन जाते हैं। इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि तकनीकी के साथ सुरक्षा का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कई बार चेतावनी दी है कि किसी भी अंजान व्यक्ति को अपना व्यक्तिगत विवरण न बताएं, फिर भी लोग असावधानी कर बैठते हैं। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल धोखाधड़ी के हजारों मामले सामने आए हैं, जिनसे आमजन की जमा पूंजी तक प्रभावित हुई है। यह स्थिति बहुत चिंताजनक है क्योंकि इससे डिजिटल सेवाओं पर जनता का विश्वास कमजोर होता है। यदि हम सचमुच डिजिटल भारत बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए केवल तकनीकी विकास ही नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाना होगा। सरकार और संस्थानों को सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ बनाना चाहिए और नागरिकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाना चाहिए। नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा क्योंकि थोड़ी-सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है। डिजिटल भुगतान या ऑनलाइन सेवा लेते समय केवल विश्वसनीय ऐप या वेबसाइट का प्रयोग करें, किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अपने मोबाइल या कंप्यूटर को मजबूत पासवर्ड से सुरक्षित रखें। तकनीकी का उद्देश्य जीवन को सरल बनाना है, असुरक्षा बढ़ाना नहीं। इसलिए सुविधा और सुरक्षा दोनों का संतुलन जरूरी है। यदि हमने डिजिटल सुरक्षा की अनदेखी की, तो डिजिटल भारत का सपना अधूरा रह जाएगा। जब तक हम स्वयं जागरूक नहीं होंगे, तब तक कोई भी तकनीकी हमें पूरी तरह सुरक्षित नहीं बना सकती। इसीलिए हमें यह समझना होगा कि तकनीकी तभी सार्थक है जब उसका उपयोग समझदारी और सावधानी से किया जाए। यही सच्चे अर्थों में डिजिटल भारत की सफलता का आधार बनेगा।
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