AGRAWAL STENO
Call us:
+91 8868822355, 9997878593
Please Wait a Moment
Menu
Dashboard
Register Now
B8 (Hindi)
Font Size
+
-
Reset
Backspace:
0
Timer :
00:00
अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे दसवीं पंचवर्षीय योजना पर अपने विचार रखने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। हमारे देश में पंचवर्षीय योजनाओं की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देना था, लेकिन हमें इस बात का ईमानदारी से मूल्यांकन करना होगा कि क्या ये योजनाएँ वास्तव में अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाई हैं? आज भी देश के करोड़ों लोग गरीबी, बेरोज़गारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमें सोचना होगा कि हमारी योजनाओं में कहाँ कमी रह गई और आगे उन्हें कैसे प्रभावी बनाया जाए। आज जब हम दसवीं पंचवर्षीय योजना पर चर्चा कर रहे हैं, तो हमें यह देखना होगा कि अब तक की योजनाओं ने हमें क्या दिया है। पहली, दूसरी, तीसरी और अन्य योजनाओं के दौरान जिन उद्देश्यों को प्राप्त करने की बात कही गई थी, वे अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हो पाए हैं। योजनाएँ कागज़ पर तो बहुत प्रभावशाली लगती हैं, लेकिन जब उनका कार्यान्वयन किया जाता है, तो कई समस्याएँ सामने आती हैं। भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और संसाधनों के अनुचित वितरण के कारण योजनाएँ अपनी पूरी क्षमता के साथ सफल नहीं हो पातीं। हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं का सही क्रियान्वयन आवश्यक है। आज भी हमारे किसानों को सिंचाई, खाद, बीज और आधुनिक कृषि उपकरणों की कमी का सामना करना पड़ता है। योजनाओं में कृषि सुधार की बात कही जाती है, लेकिन जब तक किसानों को सीधे लाभ नहीं मिलेगा, तब तक उत्पादन में वृद्धि संभव नहीं है। इसी तरह, औद्योगिक क्षेत्र में भी योजनाएँ बनाई जाती हैं, लेकिन जब तक छोटे और मझोले उद्योगों को सही सहायता नहीं मिलेगी, तब तक व्यापक आर्थिक विकास संभव नहीं होगा।एक और महत्वपूर्ण मुद्दा रोजगार का है। हर योजना में नए रोजगार के अवसर बढ़ाने की बात कही जाती है, लेकिन आज भी बेरोज़गारी देश की बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकारी और निजी क्षेत्र में नई नौकरियों का सृजन धीमी गति से हो रहा है। यदि योजनाओं का सही क्रियान्वयन किया जाता, तो आज लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटकने को मजबूर न होते। अर्थव्यवस्था को स्थिर और सशक्त बनाने के लिए हमें केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका लाभ सही मायनों में जनता तक पहुँचे। योजनाओं को बनाते समय यह ध्यान रखना होगा कि वे केवल बड़े उद्योगपतियों या उच्च वर्ग तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के हर तबके को उनका फायदा मिले। अतः, मेरा यह आग्रह है कि पंचवर्षीय योजनाओं को और अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाया जाए। योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाई जाए और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। तभी हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार कर सकेंगे।
Submit
Submit Test !
×
Dow you want to submit your test now ?
Submit